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क्या पुलिस द्वारा कायदे का अतिरेक ,संविधान’अपमान सही ठहराया जा सकता है।

क्या पुलिस द्वारा कायदे का अतिरेक ,संविधान'अपमान सही ठहराया जा सकता है।

पुलिस प्रशासन विना भेदभाव जनता के प्नती अपना दायित्व निभा रहा है। ?         देश स्वातंत्र हुवा,सामाजिक सुरक्षा,कायदा हेतु, मा.पंडीत जवाहरलाल नेहरू द्वारा 2 जानेवारी 1961 मे पुलिस विभाग की स्थापना की गयी।उद्देश सरल था समाज, प्रशासन,को सुरक्षा,प्रदान हो।पोलिस प्रशासन का दायित्व क्या है।? क्या वे अतिरेक कर जनता,कायदे का गैरवापर कर उसे अपने पैरो के निचे रौंद सकते है। ?जीस जनता के खून पसिने के पैसे के कर अदा कर पूरे विभाग को चलाया जाता है,उसी जनता के साथ अभद्रता सही ठहराया जा सकता है। ?क्या पंडीत जवाहरलाल नेहरु जीने गलती की;जो आज जनता ,समाज भुगत रहा है। क्या यह विभाग अतिरेक कर रहा है। ?        Screenshot 2026 08 05 15 57 08 64 a23b203fd3aafc6dcb84e438dda678b6 1या प्रशासन,पूंजीवादी, सरकार की कठ पुतली बन गया है। ? अगर ईस महान लोकतांत्रिक देश मे यह अन्याय जनता क्यो सहे। ,? क्या हमे यह मुददे सदन मे उठाना नही चाहीये,?अधिकार सिमा तय नही करनी चाहीये।?दिल्ली जंतर मंतर पर जीस तराह पुलिस प्रशासन द्वारा बर्बरता करी है। उस पर पर देश मे ही नही पूरे विश्व मे पुलिस के विरुद्ध आवाज उठ रही है। आज हम जनता,सरकार को पुलिस विभाग कार्य,अधिकार कक्षा तय करनी होगी,समंधित विभाग के अधिकारी, जवाबदेही ठहरानी होगी। उसके लिये पुरे देश से आवाज उठ रही है।

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